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Monday, 25 August 2014

World's most pierced man

रिकॉर्ड बनाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते पर 57 वर्षीय जर्मन निवासी रॉल्फ बुखोल्ज का किस्सा सबसे अलग है। उनके नाम अपने शरीर में सबसे अधिक जगह छिदवाने का विश्व रिकार्ड है और उनका नाम गिनीज बुक में दर्ज है। रॉल्फ के चेहरे और माथे पर कुल 453 छिद्र है जिनमें उन्होंने रिंग या स्टड डाल रखा है। चेहरे के अलावा उन्होंने गुप्तांगो में भी छिद्र करा रखे हैं। बहरहाल खबर यह है कि इस व्यक्ति को गल्फ देश दुबई ने अपने यहां आने से रोक दिया है।

रॉल्फ बुखोल्ज को दुबई के एक होटल फेयरमेंट स्थित नाईट क्लब सर्क ला सोईर ने आमंत्रित किया था पर उन्हें दुबई हवाई अड्डे पर ही रोक लिया गया और वापस भेज दिया गया। रॉल्फ का इस कल्ब में कार्यक्रम तय था. यह क्लब अजीबो-गरीब कार्यक्रम करवाने के लिए जाना जाता है। यह क्लब 2011 में खुला था और अपने लंदन ब्रांच की तरह लेट नाईट पार्टी करने वालों को कुछ हटकर मनरोंजन कराने की कोशिश करता रहता है।

कल्ब के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर जैद लहाउद ने कहा, हम हमेशा कुछ नया करने की कोशिश में लगे रहेंगे, लेकिन हम सरकारी कानून और हुक्म भी मानेंगे. उसने आगे कहा कि रॉल्फ का ना आना हमारे लिए शर्म की बात है। सरकारी अधिकारियों ने उसे वापस भेजने के पीछे कोई तर्क नहीं दिया।

Source: Hindi News

Friday, 22 August 2014

know why Boy with giant hands shunned from school?

आठ वर्षीय कलीम को एक असाधारण बीमारी है, जिसमें उस हाथ खासतौर पर पंजों का आकार असाधारण रूप से बढ़ गया है। उसके एक हाथ का वजन लगभग आठ किलो है ये 13 इंच के हैं, जो साधारण बचे के हाथ की तुलना में कई गुना बड़े हैं। कलीम की इस बीमारी को देखकर डॉक्टर भी हैरान हैं। इस बीमारी के चलते उसे स्कूल से भी निकाल दिया गया। टीचर्स कहती हैं कि अन्य बच्चे को उसके हाथों से डर लगता है।

दिल्ली के निकट एक गांव में रहने वाले कलीम की मां हालीमा का कहना है कि जब वह पैदा हुआ था, तब उसके हाथ साधारण बच्चे के हाथ की तुलना में दोगुना बड़े थे। माता-पिता उसके इलाज के लिए धन जुटाने के लिए यादा मेहनत कर रहे हैं।

दिल पर हो सकता है असर

डॉक्टरों का कहना है कि असामान्य रूप से हाथ बड़े होने की इस बीमारी को हमरटोमा कहा जाता है। हालांकि कलीम के मामले में बिना जेनेटिक जांच किए कारण बताना मुश्किल है। बीमारी के बावजूद उसका स्वास्थ्य ठीक रहता है, लेकिन लगातार बढ़ रहे हाथों से उसके हृदय पर असर पड़ सकता है।

क्रिकेट फैन है कलीम

कलीम ने बताया कि मुझे रोजाना कपड़े पहनने जैसे साधारण कार्य करने में दिक्कत होती है, लेकिन मैं अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलता हूं जो मुझे बहुत पसंद है। हालांकि डॉक्टरों को मुझे ऑपरेट करना हो तो वो केवल इंजेक्शन से ही करें, न की सर्जरी से। छोटे से ऑपरेशन से मुझे परेशानी नहीं होगी।

Source: Hindi News

Wednesday, 20 August 2014

Police report was registered for neutralizing poison

यहां एक महिला ने आत्महत्या के प्रयास में विफल होने पर एक कीटनाशक बनाने वाली कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कराया। हुआ यूं कि अपने जीवन से परेशान होकर महिला ने आत्महत्या करने का निश्चय किया। मरने के लिए उसने घर में ही रखे कीटनाशक को पी लिया। 

काफी देर तक भी जब उस जहर का महिला के ऊपर कोई असर नहीं दिखा तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वह फौरन दुकानदार के पास गई और कीटनाशक की पड़ताल की तो पता चला कीटनाशक मिलावटी था। 

महिला ने फौरन पुलिस स्टेशन जाकर इस बात की रिपोर्ट दर्ज कराई। साथ ही इस बात को भी दर्ज कराया कि नकली कीटनाशक के चलते वह जिंदा बच गई। हालांकि पुलिस स्टेशन में कंपनी पर नकली कीटनाशक बनाने के खिलाफ मामला दर्ज करने के साथ महिला पर आत्महत्या करने के प्रयास का मामला भी दर्ज किया गया .

Source: Hindi News

Tuesday, 19 August 2014

The Traffic Jam by chicken

भारतीय शहरों में आवारा मवेशियों की वजह से ट्रैफिकजाम होना आम बात है पर ऐसा ही कुछ अमेरिका जैसे देश में हो जाए तो...और वह भी मुर्गे की वजह से। अमेरिका के ओरेगन प्रांत में एक सड़क पर तब जाम की नौबत आ गई जब सड़क पार कर रहे एक मुर्गे को रास्ता देने के लिए वाहनों को रुकना पड़ा।

एक ओरेगन निवासी ने पुलिस को कॉल करके बताया कि एक मुर्गे की वजह से ट्रैफिक बहुत धीमा हो गया है क्योंकि मुर्गा सड़क पार करने के लिए काफी वक्त ले रहा है। पहले तो पुलिस को लगा कि कोई मजाक कर रहा है लेकिन कॉलर ने पुलिस को आश्वस्त किया कि यह कोई प्रैंक कॉल नहीं है और वाकई मुर्गे द्वारा सड़क के बीचो-बीच जाने और फिर बेहद धीमी गति से रोड क्रॉस करने के प्रयास के कारण गाडि़यां लगभग रूक गई हैं।

हालांकि पुलिस जबतक बताए गए स्थान पर पहुंची मुर्गा वहां से फुर्र हो चुका था लेकिन मुर्गे द्वारा सड़क पार करने की इस अजीबोगरीब घटना पर लोग तरह-तरह के चुटकले शेयर कर रहें हैं पर स्थानीय पुलिस का कहना है कि जानवरों द्वारा सड़क पार करने की घटना मजाक का विषय नहीं है। इस बार भले ही कोई दुर्घटना नहीं हुई पर ऐसे हालात कभी भी किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। 

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Friday, 8 August 2014

Unique way of identifying girls

एक साल की तीन छोटी जुड़वां बच्चियों की परवरिश उनके माता-पिता के लिए सिरदर्द बन गई। दरअसल उन तीनों की शक्लें आपस में अभी इतनी मिलती-जुलती है कि वह भी धोखा खा जाते हैं। 

इस चक्कर में गलत पहचान के चलते एक बच्ची दिन में चार बार दूध पाती और दूसरी भूखी रह जाती। 

रोज इस तरह की परेशानियों से तंग आने के बाद समस्या से निपटने के लिए उन्होंने एक नायाब तरीका खोज निकाला है। अब उन्होंने उन तीनों के पैरों के अंगूठे के नाखूनों पर अलग-अलग रंगों की नेलपॉलिश लगानी शुरू कर दी है। ऐसा करने से पहचानने के संकट से काफी हद तक उनको निजात मिल गई है।

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The Internet goes ape over a monkey selfie and the copyright battle it sparked

बंदर ने खींची सेल्फी, फोटो पर विवाद सेल्फी लेना आज एक फैशन बन गया है, सिर्फ हम, आप और बड़े सितारे ही सेल्फी के शौकीन नही है बल्कि जानवर भी इसके शौकीन बन गये हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि एक बंदर और फोटोग्राफर में सेल्फी की वजह से विवाद हो गया है।

न्यूयॉर्क इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर तीन साल पहले एक बंदर (ब्लैक मकैक, इंडोनेशिया में पाए जाने वाली बंदरों की एक प्रजाति है) द्वारा ली गई एक सेल्फी पर विकीपीडिया और जिस कैमरे से सेल्फी ली गई थी उसका मालिक फोटोग्राफर दोनों अपना-अपना मालिकाना हक जता रहे हैं। फोटोग्राफर डेविड स्लेटर का दावा है कि यह तस्वीर उनके कैमरे से ली गई है और विकीपीडिया इसे अपने पेज से हटा दे। जबकि विकीपीडिया ने इस सेल्फी को यह कहते हुए हटाने से इनकार कर दिया है कि क्योंकि यह तस्वीर बंदर ने ली थी।

विकीपीडिया के मुताबिक इस तस्वीर की कॉपीराइट उस बंदर के पास है न कि उस फॉटोग्राफर के पास विकीपीडिया ने अपनी बेवसाइट पर लिखा है, इन तस्वीरों को पब्लिक डोमेन में इसीलिए रखा गया कि इसे इंसान ने नहीं खींचा और इसलिए कोई कॉपीराइट भी नहीं बनता है। 

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Tuesday, 5 August 2014

This unique method of protest

भले ही लोग सेहत बनाने के लिए सेब का सेवन करते हों, लेकिन अब कुछ लोग सेब खाकर विरोध जता रहे हैं। यह सुनने में अजीब जरूर लग सकता है लेकिन आजकल पोलैंड के निवासियों ने रूस के प्रति अपना विरोध दर्ज कराने के लिए यही रास्ता निकाला है। इसकी वजह रूस द्वारा पोलैंड के खाद्य पदाथरें के आयात पर रोक लगाना है। विरोध की इस मुहिम को लेकर फेसबुक पर सेब खाओ, पुतिन को चिढ़ाओ स्लोगन के साथ एक पेज बनाया गया है, जिस पर लोग सेब खाते हुए अपनी तस्वीरें डाल रहें हैं। अब तक इस पेज को 17 हजार लोगों द्वारा पसंद किया जा चुका है। इतना ही नहीं पोलैंड के आम नागरिक के साथ इसमें वहां के कृषि मंत्री भी जुड़ चुके हैं। 

Source: Hindi News

Chinese mystery river appeared in red

हर किसी का सपना होता है वादियों में घर हो, सामने ही खूबसूरत फूलों से खिला हरा-भरा पार्क और उससे साथ ही कल-कल बहती एक साफ-सज्जल नदी। सचमुच ऐसे किसी घर में रहने वाला खुद को शायद दुनिया का सबसे खुशनसीब मान बैठे। खिड़की पर खड़े हों तो हवा की गति के साथ मंद-मंद बहता नदी का वह साफ, नीला पानी देखना किसी को भी स्वर्ग की अनुभूति दे सकता है। ऐसी जगह सिर्फ सपनों में नहीं, हकीकत में भी होती है। ऐसी बातें सुनकर या पढ़कर एक बार हर किसी के मन जरूर ये खयाल आता है कि काश! हम भी दुनिया की भीड़-भाड़ से दूर ऐसे किसी खूबसूरत घर में रह पाते। शायद यह खयाल अभी आपके भी मन में आ रहा हो। पर यह खूबसूरती कभी आपको डरा भी सकती है।

सोचिए अगर किसी दिन आप उठे, अलसाए हुए उठकर खिड़की पर खड़े हुए कि सामने यह क्या..नदी का पानी लाल! यह कैसे हो गया! वह भी किसी छोटे से दायरे में नहीं बल्कि पूरा का पूरा नदी का पानी ही लाल है। शायद आप भय के मारे वहां से भाग ही जाएं। पर चीन में जिस जगह की कहानी हम यहां बता रहे हैं वहां के लोगों के पास भागने का भी कोई रास्ता नहीं।

वेनझोऊ पूर्वी चीन का एक जाना-माना शहर है। तीन ओर से पहाडि़यों से घिरे इस शहर के सामने प्रशांत महासागर है। वेनझोऊ में एक नदी भी है। एक सप्ताह पहले तक नदी का पानी आम नदियों की तरह ही साफ और नीले रंग का था। लेकिन अभी एक सप्ताह के अंदर ही वह अचानक खून की नदी में बदल गई है। डरने की कोई बात नहीं, उसमें किसी का खून नहीं बहा लेकिन हां, आश्चर्य की बात जरूर है क्योंकि एक सुबह लोगों ने देखा तो नदी का पानी खूनी लाल था। रातों रात पानी का रंग कैसे बदला यह किसी को नहीं पता। अभी इसकी जांच चल रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह 5 बजे तक पानी साफ था लेकिन 6 बजते-बजते अचानक पानी का रंग लाल हो गया। इसके आस-पास कोई केमिकल इंडस्ट्री भी नहीं है और इसमें किसी तरह का रासायनिक कचरा भी बहाया नहीं जाता।

इसलिए इस कारण इसका रंग लाल होने की कोई संभावना नहीं है। हां, नदी के पास फूड कलरिंग कंपनी, कपड़ों की शॉप और पेपर मैनुफैक्चर कंपनियां जरूर हैं। इसलिए इसमें रंग मिले होने का शक भी जताया जा रहा है। पर्यावरण रक्षा अधिकारी पानी का सैंपल जांच के लिए ले गए हैं। शुरुआती जांच में अभी तक रंग बदलने का कोई कारण सामने नहीं आया है और यह एक रहस्य बना हुआ है।

हालांकि चीन में यह कोई नहीं बात नहीं है। इससे पहले भी 2011 में जिआन नदी और 2012 में इसी तरह यांगचे नदी के पानी का रंग अचानक बदल गया था। जिआन नदी का रंग बदलने के पीछे का कारण किसी डाई कंपनी का अनाधिकृत तरीके से लाल रंग की डाई को पानी में बहाया जाना था। पर यांगचे नदी के पानी का रंग बदलने के पीछे कई कारण थे जिनमें एक था बारिश के बाद नदी के पानी में गाद (पानी के बहाव से लाई हुई मिट्टी या रेत) का मिलना। इसलिए संभव है वेनझोऊ की इस नदी के पानी का रंग बदलने के पीछे भी ऐसा कोई कारण रहा हो। फिलहाल यह लोगों में कौतुहल और रहस्य का विषय बना बना हुआ है। 

Source: Hindi News

Friday, 1 August 2014

Teeth can give clues about where you came from

The discovery led by University of Florida geology researcher George D Kamenov could help police solve cold cases.
   
For instance, if an unidentified decomposed body is found, testing the lead in the teeth could immediately help focus the investigation on a certain geographic area.
   
That way, law enforcement can avoid wasting resources checking for missing persons in the wrong places.
   
"We can use this pollution signal to figure out where these people came from," he said.
   
Lead is composed of four variants, called isotopes. The amount of those isotopes fluctuates in different rocks, soils and ores - and, therefore, regions of the world.
   
Mining and other pollution-causing activities release that lead into the environment and it accumulates in children's bodies as they grow because kids inhale dust and ingest soil when they put their hands in their mouths.
   
Tooth enamel, which develops during childhood, locks in the lead signals and preserves them.
   
"When you grow up, you record the signal of the local environment. If you move somewhere else, your isotope will be distinct from the local population," Kamenov said.
   
Even different teeth can reveal certain facts.
   
First molar enamel is finished forming by age three, so it provides information about birth and toddler years.
   
Incisor and canine enamel starts later and finishes around age five, so it gives insight into early childhood. The third molar enamel does not start forming until age eight, so it indicates late childhood residences.
   
Lead analysis can also tell what time period a body is from.
   
Modern and historical teeth have different signals, according to the study. The natural composition of lead changed over the past century because of mining and the use of leaded gasoline, so there's a clear distinction between modern and historical human exposure.
   
Using that information, archaeologists can identify early European bodies in New World areas.
   
"You can go back in time, look at archaeological sites and try to reconstruct human migration," Kamenov said.
   
The study was published in the journal Science of The Total Environment.

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Wednesday, 16 July 2014

Pizza in Rs one crore

पिज्जा खाने के चक्कर में एक व्यक्ति को जिंदगी भर का सबक मिल गया। उसने एक शाम बाहर से पिज्जा का ऑर्डर किया। पिज्जा आने पर क्त्रेडिट कार्ड से बिना चेक किए पेमेंट कर दिया।

दूसरे दिन जब बाजार गया तो सामान लेने के बाद भुगतान करने के दौरान कार्ड में बैलेंस जीरो होने की बात पता चली। यह सुनते ही उसके पैरों तले जमीन सरक गई क्योंकि उसके क्त्रेडिट कार्ड की सीमा एक लाख अस्सी हजार डॉलर (तकरीबन एक करोड़ रुपये) थी। फौरन उसने बैंक वालों को फोन किया तो पता चला कि पिज्जा वाले को भूलवश 18 डॉलर (तकरीबन एक हजार रुपये) के बजाय एक लाख अस्सी हजार डॉलर का पेमेंट हो गया। लिहाजा अकाउंट खाली हो चुका है। हैरान-परेशान उस व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई और दो दिन बाद कार्ड में पैसे वापस लौटे। 

Source: News in Hindi

Wednesday, 9 July 2014

Huge amount of money transferred accidentally into another account

पार्टी तो बस बहाना है, लड़कियों को तो बस मौका चहिए तैयार होने का। लड़की दुनिया के किसी भी कोने की हो, वहां का कल्चर, वहां के रीति-रिवाज चाहे जैसे भी हों लेकिन इनका सजना-संवरना हर जगह होता है। खूबसूरत दिखने और दूसरों से अपनी खूबसूरती की तारीफ पाने के लिए वे क्या-क्या नहीं करतीं।

दुनिया भर में ब्यूटी प्रोडक्ट्स की फलती-फूलती बड़ी रेंज इसका गवाह है। इन खूबसूरत महिलाओं की खोज में मिस व‌र्ल्ड, मिस यूनिवर्स और जाने कितनी-कितनी सौंदर्य प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। ऐसी प्रतियोगिताओं में एक तरफ जहां खूबसूरती को प्राइज दिया जाता है वहीं एक ऐसी भी जगह है जहां इसके ठीक उलट खूबसूरत दिखने के कारण एक महिला को कई हजार डॉलर का हर्जाना भुगतना पड़ा।

मिशेल हचिंग्स के बैंक अकाउंट में 85000 डॉलर थे। वह मार्केट गई और कुछ डिजायनर हैंड बैग्स, शूज, सन ग्लासेस और एसेसरीज खरीद लाई। इसके बाद मिशेल की मुश्किलें बढ़ गईं। नौबत जेल जाने तक की आ गई।

दरअसल हुआ यह कि सेंट्रल इंग्लैंड की लिकफील्ड काउंसिल से भूलवश 85000 डॉलर मिशेल के अकाउंट में ट्रांसफर हो गए। इतने पैसे होने पर मिशेल ने कोई छानबीन करने की जरूरत नहीं समझी और मार्केट से महंगी चीजें खरीद आईं। बाद में कोर्ट ने जब मिशेल को इसकी कीमत अदा करने के एवज में जेल जाने की शर्त रखी तो मिशेल काउंसिल के पैसे लौटाने को राजी हो गईं लेकिन लौटाते हुए उसका जो बयान था वह बड़ा अनोखा है। मिशेल का कहना है कि वह बेहद खूबसूरत है इसलिए जानबूझकर उसे गलत तरीके से सजा देने की कोशिश की गई है। 

Source: Hindi News

Saturday, 31 May 2014

Purchased ten million Car in ten bucks

दस रुपये में कार खरीद लेना कोरी कल्पना जैसा लगता है, लेकिन यहां के एक व्यक्ति ने अपनी तिकड़म से इसे सच कर दिखाया। दरअसल वह एक लाख युआन (तकरीबन दस लाख रुपये) की कार को एक युआन (तकरीबन दस रुपये) के बिल पर खरीदना चाहता था। 

 जिसके लिए उसने तरीका निकाला कि वह बिल दस रुपये का लेगा और बाकी की रकम नगद में देगा। इस तरीके को सुन कार शोरूम वाले भी तैयार हो गए। लेकिन पूरे मसले में पेंच तब फंसा जब व्यक्ति ने बाकी धनराशि के सिक्के शोरूम वालों को थमा दिए।

सिक्कों को देख सभी हैरान रह गए। फिर भी सभी कर्मचारी इस काम में जुट गए और कार का भावी मालिक सोफे पर बैठ डिलीवरी मिलने का इंतजार करने लगा। गिनती शुरू हुई और आधी रकम गिनने में पूरा दिन लग गया। कर्मचारियों का बुरा हाल देख आखिर में उसे दया आ गई और उसने बाकी रकम की गिनती रुकवाकर क्रेडिट से बिल अदा किया।

Source: Hindi News

Friday, 25 April 2014

Canadian woman receives letter in the post 45 years after it was sent

देर आए मगर दुरुस्त आए। यह कहावत कनाडा के डाक विभाग पर पूरी तरह से ठीक बैठती है। क्योंकि यहां के डाक विभाग ने एक अधूरे पते वाले पत्र को सही हाथों तक पहुंचाने में 45 साल लगा दिए। 

हुआ यूं कि एक महिला ने 1969 में अपनी बहन को एक पत्र भेजा। लेकिन पत्र पर लिखे पते में नाम और शहर के अलावा अन्य जानकारियां गलत थी। इस कारण यह पत्र उस समय पते पर नहीं पहुंचा। 

लंबे समय बाद जब पत्र पाने वाले ने किसी अन्य वजह से अपना ठिकाना बदलकर डाक विभाग को सूचित किया कि अब इस पते पर आने वाली डाक को उसके नए पते पर भेजें तो डाक विभाग द्वारा सालों से पड़ी उस पाती के मालिक की अनायास पहचान कर ली गई। विभाग ने पत्र पाने वाले को पत्र के साथ एक नोट लिखकर भी भेजा। हालांकि इसमें चार दशकों से अधिक की हुई देरी के लिए खेद नहीं व्यक्त किया गया था बल्कि पत्र के खस्ताहाल हो जाने की स्थिति पर जरूर खेद प्रकट किया गया था।

Source: Hindi News

Wednesday, 23 April 2014

Pet cat attack sends three to hospital in US

अमेरिका में एक गुस्सैल बिल्ली ने एक परिवार के सदस्यों पर हमला कर दिया जिसमें एक बच्चे सहित परिवार के तीन सदस्य बुरी तरह जख्मी हो गये।

इस गुस्सैल बिल्ली से परिवार के सभी सदस्य बुरी तरह घबरा गये और इस बिल्ली को काबू में करने के लिए बिल्ली पर एक कंबल फेंककर पकड़ लिया और पिंजरे में बंद किया गया जिससे यह और कोई नुकसान न पहुंचा सके।

घटना के बाद परिवार के सभी सदस्य इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे और उस गुस्सैल बिल्ली को स्थानीय पशु क्रूरता निवारण शाखा को सौंपा गया है जो इस गुस्सैल बिल्ली की जांच कर रही है। 

Source: Hindi News

Wednesday, 16 April 2014

Reached the hospital in joy

खुशी के मारे पागल हो जाने वाली कहावत तो आपने सुनी होगी। ऐसे ही वाकये में एक व्यक्ति खुशी से पागल तो नहीं हुआ लेकिन अस्पताल जरूर पहुंच गया। हुआ यूं कि इस व्यक्ति को हाल ही में एक कंपनी में उच्च पद और मोटे वेतन वाली नौकरी मिली। वह सफलता हजम नहीं कर पाया। 

अपनी खुशी साझा करने के लिए उसने अपने परिजनों और दोस्तों को भव्य पार्टी दी। पार्टी में इसने जमकर शराब पी। इसके बाद दोस्तों ने रोकने की कोशिश की लेकिन इसने एक नहीं सुनी और पीता रहा। थोड़ी देर बाद इसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। 

अब महाशय नौकरी पर जाने के बजाय छुट्टी लेकर अस्पताल में दिन गुजार रहे हैं।

Source: Hindi News

Tuesday, 15 April 2014

Skateboarding Goat, Happie, Sets Guinness World Record

कौन कहता है कि जानवर मनुष्य की तरह काम नही कर सकते हैं अगर आप भी ऐसा ही समझते हैं तो जनाब हम आपको बता दें कि जानवरों के पास भी दिमाग होता है और हमारी आपकी तरह ही सबसे आगे रहने की इनकी कोशिशें भी होती हैं। ये इंसानों से खुद को कम नहीं समझते और वह सब करना चाहते हैं जो इंसान करते हैं। जी हां हम यहां बात कर रहे हैं एक ऐसी बकरी की जो आपको बहुत दौड़ाने वाली है।

2014 के लिए गिनीज बुक ऑफ वल‌र्््ड रिकॉर्ड में दर्ज होने वालों में एक नाम अमेरिका की हप्पी का भी है। आप जरूर जानना चाहेंगे कि ये हप्पी कौन है! अंदाजा लगाइए यहां जानवरों की बात हो रही है तो यह कौन सा जानवर होगा? जी नहीं, यह कोई कुता, बिल्ली, शेर या बंदर नहीं है। ये है सबसे अलग बकरी। लेकिन इसे आम बकरी समझने की भूल मत कीजिए। यह इंसानों से एक कदम आगे चलने वाली बकरी है। अमेरिका की मेलोडी कूक की यह बकरी आज चर्चित चेहरा है। क्यों? क्योंकि यह आम बकरियों की तरह धीरे-धीरे चलने की बजाय सीधे स्केट पर दौड़ती है। जी हां, हप्पी स्केटिंग करती है। इसने बकरियों की स्केटिंग का पिछला रिकॉर्ड भी तोड़ा है। इसके लिए इसका नाम 2014 के लिए गिनीज बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ है। हप्पी की केयर टेकर मेलोडी कूक कहती हैं कि गिनीज बुक में नाम दर्ज होने के बाद इसके हाव-भाव में भी बहुत बदलाव आया है। वह शायद समझती है कि अन्य बकरियों में वह बहुत खास है। इसलिए उसकी चाल भी अब गर्वीली हो गई है। उससे बात करने पर भी उसका अंदाज अब खास व्यक्तियों की तरह होने लगा है।

Source: Hindi News

Tuesday, 8 April 2014

The dog gave testimony in a murder case in france

फ्रांस की एक अदालत में नौ साल के एक कुत्ते को मालिक के हत्यारे को पहचानने के लिए कठघरे में बुलाया गया।

टैंगों नाम के लैब्राडोर नस्ल के इस कुत्ते को मध्य फ्रांस के टोर्स की अदालत में हत्या के मामले की शुरुआत जांच के दौरान मालिक के संदिग्ध हत्यारे को पहचानने के लिए बुलाया गया था। आरटीएल रेडियो की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने संदिग्ध को एक बैट से कुत्ते को डराने को कहा ताकि टैंगो की प्रतिक्रिया समझ कर हत्यारे को पहचाना जा सके। इस परीक्षण को निष्पक्ष रखने के लिए टैंगो की तरह दिखने वाले नोरमन नाम के एक अन्य कुत्ते को भी अदालत में बुलाया गया। संदिग्ध से नोरमन को उसी तरह डराने को कहा गया लेकिन यह परीक्षण पूरी तरह विफल हो गया। 

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब फ्रांस की किसी अदालत ने गवाही के लिए किसी कुत्ते को अदालत में बुलाने को मंजूरी दी है। पिछले महीने भी अदालत में एक कुत्ते को हत्या के दो संदिग्धों की तस्वीर दिखाकर उन्हें पहचानने की कोशिश की गई थी। अदालत में एक पशु चिकित्सक को भी बुलाया गया था ताकि वह कुत्ते के हाव भावों को समझ सके। वर्ष 2008 में स्कूबी नाम के कुत्ते को पहली बार हत्या के संदिग्ध की पहचान के लिए अदालत में बुलाया गया था।

Source: Hindi News

Friday, 4 April 2014

Crying without tears

पांच साल की रानी (परिवर्तित नाम) रोती है पर जन्म से ही आंखों से आंसू नहीं आता। धीरे-धीरे उसका गोरा रंग भी काला पड़ गया। जांच में पता चला कि उसे रेयर जेनेटिक (अनुवांशिक) बीमारी है। जो उसके सेहत के लिए खतरा साबित हो सकता था। पर दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में कृत्रिम आंसू डालकर उसकी आंखें गीली की गई।

इसके अलावा उसे हार्मोनल मेडिसिन देने पर उसके सेहत में सुधार शुरू हो गया है। यही नहीं रानी की बीमारी से ढाई साल के छोटे भाई की बीमारी भी पकड़ी गई। छोटे भाई को भी यही बीमारी है। वह भी रोता है पर उसके आंख से आंसू नहीं आता। रानी चार भाई बहन है, जिसमें दो भाई व दो बहनें हैं। एक भाई व एक बहन रानी से बड़े हैं। दोनों बड़े भाई बहनों को यह परेशानी नहीं है। रानी के माता-पिता मूलरूप से बिहार पटना के रहने वाले हैं। उसके पिता दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में अच्छे ओहदे पर नौकरी करते हैं। रानी की मां ने बताया कि दोनों छोटे बच्चों में यह परेशानी है। आंसू नहीं आने के कारण रानी की आंखें लाल रहने लगी थीं। शुरूआत में आंख के डॉक्टरों से इलाज कराने पर उन्होंने कहा कि उसकी आंखों में कोई दिक्कत नहीं है। करीब एक साल पहले वह बीमारी पड़ी। यूरिन में खून की मात्रा आने से वह कमजोर हो गई। इलाज करने पर वह बीमारी तो ठीक हो गई पर धीरे-धीरे उसका रंगा काला पड़ गया। तब त्वचा रोग विशेषज्ञ ने हार्मोन के डॉक्टर से दिखाने की सलाह दी। शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल के एंटोक्रिनोलॉजी विभाग की डॉक्टर वैशाखी रस्तोगी ने बताया कि हार्मोनल जांच करने पर पता चला कि रानी को एलग्रोव सिंड्रोम है। जो किडनी के उपर रहने वाले एडिनल ग्लैंड द्वारा कॉर्टिसॉल हार्मोन नहीं बनने के कारण है। इसके चलते रानी के हाथ-पैर, आंखों के नीचे का हिस्सा यहां तक कि मसूड़ा भी काला पड़ गया। हार्मोन की कमी दूर करने के लिए उसे कार्टिसॉल दवा देनी शुरू की गई है।

Source: Hindi News

Monday, 31 March 2014

Criminal walks free because he is too big for prison

Jude Medcalf
Medcalf, who was involved in a series of crimes, was ordered to be released as he suffers from a growth disorder, Klinefelter syndrome. He terrified a woman by firing a BB gun at her through a window. He then went on to steal Christmas presents and tea money from an NHS office.

Medcalf was freed from jail after Recorder Adam Vaitilingam QC was told he had already spent 75 days in custody. He had faced problems throughout his time in custody because there were no beds or uniforms to fit him.

While he said the ‘temptation is to pass a lengthy sentence’, he added: ‘You have recently been diagnosed with Klinefelter Syndrome, which has no doubt caused you problems throughout your life with people picking on you.’ He was given a six-month curfew and 12-month community order after being held in jail on remand.

Courtesy: Mid-day

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Friday, 28 March 2014

The fish with FOUR eyes

प्रकृति ने वाकई एक से एक हैरान कर देने वाले जीवों को बनाया है। ये जीव अपनी खासियत से सबको हैरान कर देते हैं।

हम यहां बात कर रहे हैं एक ऐसी ही मछली के बारे में जिसकी एक या दो नहीं बल्कि चार आंखें हैं और वो किसी शीशे सी पारदर्शी है।

हम बात कर रहें हैं ग्लासहेड बारर्ले फिश के बारे में जो समुद्र में 800 से 1000 मीटर के अंदर रहती है। आमतौर पर किसी भी मछली के दोनों तरफ एक आंख होती है। लेकिन ग्लासहेड मछली के दोनों तरफ दो बड़ी और चमकीली आंखें होती हैं।

यह मछली द.अफ्रीका के केपटाउन के नजदीक स्थित पूर्वी अटलांटिक महासागर में पाई गई हैं। ये मछलियां ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच सागर में भी मिलती हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि गहरे पानी में रहने वाली ये चार आंखों वाली मछलियां अपनी आंखों से एक ही बार में चार जगह देख सकती हैं।

सामने की दो आंखों से ये मछलियां अपने आगे के शिकार का पीछा करती हैं। जबकि पीछे की दो आंखों से वो अपने बगल में चल रही गतिविधियों और पानी में और नीचे चल रहे चीजों को एक साथ देख सकती हैं। 

Source: Hindi News